डेयरी उद्यमिता विकास योजना (डीईडीएस)

डेयरी उद्यमिता विकास योजना पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य को लेकर शुरु की गई योजना है। इस योजना में पशुपालकों को गाय और भैंस खरीदने के लिए लोन दिया जाता है। केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा यह सब्सिडी राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के माध्यम से शुरु की गई डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) के लिए बजट स्तर साल 2019-20 हेतु 325 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

भारत को गाँवों का देश कहा जाता है। भारत में बारें में कहा जाता है कि यहां कि 75% जनसँख्या ग्रामीण ईलाकों में निवास करती है। जब इतनी बड़ी जनसँख्या ग्रामीण ईलाकों में निवास करती है, तो स्वभाविक तौर पर इन लोगों को रोजगार की जरूरत पड़ती होगी।

ग्रामीण भारत में दूध का व्यापार बहुत बड़ी संख्या में होता है। अगर दूध के व्यापार को डेयरी के तर्ज पर किया जाये तो इस बिजनेस में बेहतर मुनाफा प्राप्त होगा। सरकार पशुपालकों को डेयरी खोलने के लिए प्रोत्साहन दे रही है। प्रोत्साहन के तौर पर 33% सब्सिडी पर लोन मुहैया कराया जाता है।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) ZipLoan द्वारा एमएसएमई कारोबारियों को 7.5 लाख तक का बिजनेस लोन, बिना कुछ गिरवी रखे, न्युनत्तम कागजातों पर, सिर्फ 3 दिन में प्रदान किया जाता है।

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डेयरी उद्यमिता विकास योजना (डीईडीएस) क्या है?

यह एक पशुपालकों को डेयरी शुरु करने के लिए प्रोत्साहित करने वाली योजना है। इस योजना के तहत डेयरी शुरु करने के लिए या पुरानी डेयरी का विकास करने के लिए नाबार्ड बैंक से 33 प्रतिशत तक सरकारी सब्सिडी पर लोन मिलता है। इस योजना को शुरु करने का उद्देश्य ग्रामीण भारत में रोजगार सृजन करना है।

ग्रामीण भारत में रोजगार की वास्तविक स्थिति आज भी बहुत अच्छी नहीं है। ग्रामीण ईलाकों में फक्ट्रियां नहीं हैं। कम्पनियां नही हैं और न ही कोई और रोजगार का साधन है। ऐसे में ग्रामीण लोग अपना जीवनयापन कैसे करते हैं? यह बड़ा सवाल है। इस सवाल का उत्तर है – ग्रामीण ईलाकों में रहने वाले लोग स्वरोजगार के जरिये अपना जीवनयापन करते हैं।

स्वरोजगार में खुद की दुकान चलाना, छोटे – मोटे कारखाने चलाना और गाय – भैंस के दूध का व्यापार इत्यादि मुख्य स्वरोजगार के साधन हैं। इन सभी साधनों में गाय – भैंस के दूध का व्यापार करना बहुत मुनाफे वाला व्यापार है। 

अगर दूध के व्यापार को बड़े स्तर पर किया जाए तो इस बिजनेस में बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है और अधिक लोगों तक अपना बिजनेस पहुंचाया जा सकता है। दूध का व्यापार बड़े स्तर पर करने के लिए डेयरी उद्यमिता सबसे सही  विकल्प है।

चूंकि डेयरी उद्यमिता को शुरु करने के लिए अधिक संख्या में गाय – भैंस रखने की जरूरत होती है और इसी के साथ बहुत से और खर्चे भी होते हैं। अब जिन पशुपालकों के पास पर्याप्त धन नहीं होता है, वह चाहते हुए भी अपना डेयरी बिजनेस शुरु नहीं कर पाते हैं।

ठीक इसी तरह जिन दूध कारोबारियों के पास पहले से डेयरी होती है लेकिन उसको ठीक से चलाने के लिए धन की जरूरत होती है लेकिन कारोबारियों के पास पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं होता है। इस स्थिति में कारोबारी चाहते हुए भी खुद की डेयरी का विकास नहीं कर पाते हैं। 

इस तरह की स्थिति का सामना कर रहे लोगों की आर्थिक मदद करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) शुरु हुई है। इस योजना के तहत जरूरतमंद लोगों को 33 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी पर 7 लाख रुपये तक का लोन नाबार्ड बैंक के माध्यम से प्रदान किया जाता है।

डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) का लाभ किसको मिल सकता है?

केन्द्र सरकार द्वारा शुरु की गई डेयरी उद्यमिता विकास योजना का लाभ निम्न लोगों और संस्थाओं को मिल सकता है:

 

इत्यादि लोग और संस्थाएं डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) का लाभ उठाने के लिए पात्र हैं। पात्रता जानने के बाद यह जान लेना आवश्यक है कि डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) का लाभ लेने के लिए शर्ते क्या हैं? 

डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) की शर्तें निम्न हैं 

 

डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) का लाभ लेने के लिए कागज़ी जरूरी दस्तावेज

 

डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) के द्वारा इन संस्थाओं से लोन मिलता है 

इस योजना के अंतर्गत आप निम्न बैंकों से लोन प्राप्त कर सकते हैं:

 

डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) से लोन के लिए अप्लाई कैसे किया जाता है?

इस योजना के जरिये लोन का लाभ प्राप्त करने के लिए ऊपर बताए गये बैंकों की ब्रांच में जाना होता है। बैंक में जाकर डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) योजना के जरिये लोन के लिए ब्रांच मैनेजर से बात करना होता है। 

बैंक से एक फॉर्म दिया जाता है। उस फॉर्म को भरकर, फॉर्म के साथ सबही जरूरी कागजात लगाकर जमा कर देना होता है। इसके बाद रेगुलर तौर पर बैंक में जाकर अपने लोन आवेदन की स्थिति जांचते रहने होता है। 

जब आपका लोन स्वीकृत हो जाता है तो इसके बाद सब्सिडी का लाभ उठाने के तरीके के बारे में बैंक दारा जानकारी दी जाती है। अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी नाबार्ड बैंक की ब्रांच ऑफिस पर संपर्क करें। आप चाहें तो नाबार्ड की वेबसाइट https://nabard.org पर भी योजना के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ZipLoan से मिलता है सिर्फ 3 दिन* में 7.5 लाख तक का बिजनेस लोन 

दूध कारोबारियों को तत्काल पैसों की जरूरत को देखते हुए नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) की प्रमुख कंपनी ZipLoan द्वारा कारोबारियों को सिर्फ 3 दिन* में बिना कुछ गिरवी रखे 5 लाख तक का बिजनेस लोन 6 महीने बाद प्री – पेमेंट फ्री दिया जाता है।

ZipLoan द्वारा दूध कारोबारियों के लिए समय का महत्व समझा जाता है इसलिए अधिक कागजी दस्तावेजों की मांग नहीं की जाती है बल्कि सिर्फ 4 कागजी दस्तावेजों पर बिजनेस लोन मुहैया कराया जाता है। 

जिन कागजी दस्तावेजों की मांग की जाती है वह लिस्ट निम्न है:

 

कई ऐसे कोरोबारी होते हैं जो कई बार दूसरी कंपनियों और बैंकों से बिजनेस लोन पाने के लिए पात्र नहीं होते हैं। ऐसे कहीं ऐसा न हो कि कारोबारी अधिक पात्रता मापदंडो के चलते बिजनेस लोन से वंचित न रह जाये इसीलिए ZipLoan द्वारा बिजनेस लोन के लिए बेहद आसान पात्रता निर्धारित किया गया है। 

ZipLoan से बिजनेस लोन प्राप्त करने की पात्रता निम्न है:

 

ZipLoan से बिजनेस लोन लेने का लाभ 

 

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बुनियादी समस्याओं का हल

राम यादव

मैं बारह वर्षों से अपना कारोबार चला रहा हूं लेकिन अपने बिजनेस का विस्तार करने के लिए सक्षम नहीं था। मैंने Ziploan में आवेदन किया और उन्होंने मेरे लोन आवेदन को बहुत ही कम समय में मंजूरी दे दी।

कंचन लता

मैंने अपने कारोबार की ज़रूरतों के लिए ZipLoan से संपर्क किया। कंपनी से लोन पाने की शर्तें पूरा करना आसान था। उन्हें सिर्फ 1 साल का ITR और बिजनेस का सालाना टर्नओवर 10 लाख तक की जरूरत थी।

क्या आप भी ZipLoan के मदद से अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए तैयार हैं?