कार्यशील पूंजी नीतियों के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

कारोबार का संचालन करने के लिए विभिन्न प्रकार के धन की आवश्यकता होती है। इसे हम यह भी कह सकते हैं कि कारोबार के विभिन्न कार्यों के लिए विभिन्न तरह की बजट का आवंटन होता है। मतलब हर कार्य के लिए अलग – अलग मद में बजट का आवंटन होता है।

किसी भी बिजनेस या कंपनी में वर्किंग कैपिटल के आवंटित होने वाला धन बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसे हम यह भी कह सकते हैं कि किसी भी कंपनी या बिजनेस का वर्किंग कैपिटल ऑक्सीजन होता है। जिस प्रकार से बिना ऑक्सीजन के कोई व्यक्ति जिंदा नहीं रह सकता है। ठीक उसी प्रकार बिना वर्किंग कैपिटल के किसी
बिजनेस/कंपनी को अधिक दिनों तक नहीं चलाया जा सकता है।

वर्किंग कैपिटल को ही हिंदी में कार्यशील पूंजी कहा जाता है। कार्यशील पूंजी यानी कि बिजनेस को गतिशील रखने वाला धन। जिस बिजनेस में कार्यशील पूंजी की कमी हो जाती है, उन बिजनेस के लिए बेहतर होता है कि वह बिजनेस लोन लेकर अपना वर्किंग कैपिटल मजबूत कर लें।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि देश की प्रमुख एनबीएफसी ZipLoan द्वारा एमएसएमई को 7.5 लाख तक का बिजनेस लोन, बिना कुछ गिरवी रखे, सिर्फं 3 दिन* में प्रदान किया जाता है। आइये कार्यशील पूंजी नीतियों के विभिन्न प्रकार के बारें में समझते हैं।

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कार्यशील पूंजी नीतियों के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

जिस प्रकार कारोबार अलग – अलग प्रकार का होता है, ठीक उसी प्रकार कार्यशील पूंजी भी कई प्रकार की होती है। कार्यशील पूंजी प्रकारों में स्थायी कार्यशील पूंजी, अस्थायी कार्यशील पूंजी, सकल और निवल कार्यशील पूंजी, नेगेटिव कार्यशील पूंजी, नियमित कार्यशील पूंजी, सीज़नल कार्यशील पूंजी और विशेष कार्यशील पूंजी प्रमुख है।

यहां बताई गई सभी कार्यशील पूंजियों का आवंटन अलग और सृजन प्रक्रिया अलग – अलग होता है। सभी का कार्य अलग होता है। लेकिन सभी कार्यशील पूंजियों का एक ही लक्ष्य होता है, वह है- बिजनेस के संचालन में किसी तरह की कोई दिक्कत न आये। आइये इन सभी कार्यशील पूंजियों के बारें में विस्तार से समझते हैं।

कार्यशील पूंजी नीतियों के विभिन्न प्रकार

कार्यशील पूंजी नीतियों के विभिन्न प्रकार

कुल 8 प्रकार की कार्यशील पूंजी होती है। आइये समझते हैं कि इन 8 कार्यशील पूंजियों का सृजन कैसे होता है और इनका कार्य क्या होता है।

स्थाई कार्यशील पूंजी: सभी तरह की कार्यशील पूंजी यानी वर्किंग कैपिटल में यह सबसे महत्वपूर्ण और मूल है। इसे फिक्स्ड कार्यशील पूंजी या हार्ड कोर कार्यशील पूंजी के रूप में भी जाना जाता है। इस सृजन बिजनेस के इनकम में से किया जाता है। स्थाई कार्यशील पूंजी का कार्य बिजनेस को सुचारू संचालन का है।

निवल कार्यशील पूंजी: बिजनसे के लेनदारी और देनदारी को देने के बाद जो रकम बचती है, उसे निवल कार्यशील पूंजी कहते हैं। बिजनेस के संचालन में बदलाव और बाजार की स्थितियों के अनुसार इसे वेरिएबल या उतार-चढ़ाव वाली कार्यशील पूंजी भी कहा जाता है।

सकल और निवल कार्यशील पूंजी: यह कार्यशील पूंजी भी बिजनेस की कुल लेनदारी और देनदारी से बचने के बाद बचने वाली रकम होती है। इस तरह की पूंजी को बिजनेस के ऑपरेटिंग साइकिल के भीतर कन्वर्ट करना आसान होता है। बिजनेस की निवल कार्यशील पूंजी सकल कार्यशील पूंजी और वर्तमान देनदारियों के बीच का अंतर होती है।

नेगेटिव कार्यशील पूंजी: जैसा कि हम सभी जानते हैं कि नकारत्मक यानी नेगेटिव होना अच्छी बात नहीं होती है। ठीक यही फ़ॉर्मूला वर्किंग कैपिटल में भी लागू होता है। बिजनेस की कुल इनकम के बाद कुल देनदारी चुकाने के बाद अगर कोई रकम नहीं बचती है। बल्कि उधारी अभी भी रह जाता है तो इसे हम नेगेटिव वर्किंग कैपिटल के नाम से जानते हैं।

नियमित कार्यशील पूंजी: जिस प्रकार हमारे शरीर को नियमित तौर पर भोजन की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार बिजनेस को चलाने के लिए भी नियमित तौर धन की आवश्यकता होती है। किसी भी बिजनेस के दैनिक संचालन में लगने वाले घन को नियमित कार्यशील पूंजी कहा जाता है।

सीज़नल कार्यशील पूंजी: अपने देश में मुख्य रुप से चार मौसम होता है। सभी मौसम अपने आप में खास होता है। बिजनेस में भी मौसम का बहुत प्रभाव है। कुछ प्रोडक्ट को मौसम के अनुसार मार्केट में उतारा जाता है। इसे सीजनल प्रोडक्ट कहते हैं। उदाहरण के लिए गर्मी के मौसम में पंखा, कूलर एयरकंडीशन इत्यादि की मांग मार्केट में अचानक बढ़ जाती है। गर्मी के मौसम में इन प्रोडक्ट की मांग को पूरा करने के लिए कारोबारियों को पहले से ही धन की व्यवस्था करके रखना होता है। इसी को सीजनल कार्यशील पूंजी कहते हैं।

विशेष कार्यशील पूंजी: आज की तारीख में टेक्नोलॉजी बहुत उन्नत हो चुकी है। उन्नत टेक्नोलॉजी के चलते हर रोज में नई – नई मशीने मार्केट में आती रहती हैं। कारोबारी को चुकी मार्केट में बने रहना होता है, तो उन्हें भी अपने बिजनेस पर नई – नई मशीने रखना होता है। ऐसे ही कई जरूरत अचानक आ सकती है। इन
अचानक आने वाली जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष कार्यशील पूंजी का इंतजाम करना सभी कारोबारियों के लिए अनिवार्य होता है।

इस तरह से आपने जाना और समझा कि कार्यशील पूंजी नीतियों के विभिन्न प्रकार क्या हैं। एक जानकारी आपको देना चाहेंगे कि वर्किंग कैपिटल जिस बिजनेस में नहीं होता है, उन बिजनेस को चाहिए कि बिजनेस लोन लेकर वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करें।

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राम यादव

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